KAAGAZI
प्रिय पाठकों ,
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| (every blank diary filled with space) |
To be frank कहूँ तो, Anne frank की डायरी के पन्नों को पढ़ते हुए मैंने पाया है कि, सच में कागज़ इंसानों से अधिक सहनशील होते हैं| चाहे वह कागज़ का नक्शा हो या रद्दी का कागज या फिर दफ़्तर में पड़ी कागज की फ़ाइलें| शायद सहनशील होने का गुण कागज़ के डीएनए (DNA) में होता है| जो उन्हें पेड़ों के सेलुलोस (cellulose) से मिलता है, और आप इसे पल्प फिक्शन(pulp fiction) कहें या कुछ और मुझे आज भी पेपर मनी(paper money)की पेड़ों पर लगने वाली बातें भी कहीं न कहीं सच ही लगती है|
कागज़ और इन्सानों के बीच तुलना सलीके से की जाती है, लेकिन समानता, महान दार्शनिक रूसो(Rousseau) बता के गए हैं, वे कहते हैं की 'इन्सान का मन कोरे कागज़ के समान होता है'| अब इस सिग्नेचर लाइन (signature line) का प्रयोग हिन्दी फिल्मों ने सुपरहिट गाने दे के किया है, तो वहीं इस सिग्नेचर लाइन को गंभीरता से अपनाकर कुछ जरूरत से ज्यादा पढे लिखे लोगों ने मन के कोरे कागज़ पर बेवजह हर वक्त कागजी घोड़े दौड़ाने(लिखा पढ़ी करना) का काम किया है| ये लोग देश की GDP से लेकर इन्सानों की DP(display profile) तक पर कागजी घोड़े दौड़ने का काम करते हैं| ना जाने इनके पास ऐसा कौनसा लिट्मस कागज़(litmus paper)है,जिससे यह दूसरे की बेसिक बुद्धिमत्ता का पता लगा लेते हैं|
मैंने अक्सर ये पाया है कि जब हर जगह बिना बात के कागज़ी घोड़े दौड़ना बंद किए जाते हैं, तो दुनिया अलग नजरिए से दिखाई पड़ती है| तब कगज़ी किताबों का बोझ नहीं लगता, मानवीय संबंधों में कोई नाराजगी कागज़ी नहीं रहती,और कागज़ी ख़याल से एक लेखक और उसकी यूज एण्ड थ्रो (use and through ) पेन को कागज़ जोड़ पाता है| शायद तभी कागज़ की नाव,जहाज और पक्षी बड़े उत्साह से बनाए जाते हैं |
ख़ैर कागज़ी ख़याल की भी अपनी-अपनी दुनिया होती हैं , कुछ इन्हें डायरी का रूप दे देते हैं, तो कोई उपन्यास और कविता संग्रह का,कोई इन खयालों को फ़ाइल्स का रूप देकर अलमारी में सजाए रखते हैँ, तो कोई इन्हें जलाकर ठंड में आग सेकते हैं, और कुछ होतें हैं जो इन कागज़ी खयालों को इलेक्ट्रॉनिक संजाल के मैदान में बो कर कागज़ के फूल बनने का इंतजार करते हैं|
_G



So Good man!! Every paragraph is very good and clear..and ending is excellent.
ReplyDeleteआपकी हर बात में एक सच्चाई उजागर होती है, एक creative thinker हैं आप, सच बताऊं तो पढ़ने में मजा ही आ गया , ऐसे ही अपनी बात हम पाठकों तक पहुंचाते रहो, "keep it up"my friend
ReplyDeleteकहाँ से आते हैं ऐसे रचनात्मक लोग,
ReplyDeleteहाँ देखा तो है तुझे काग़ज़ की नाव बनाते हुए, और फिर उस नाव को डूबते हुए भी
Bhut hi khubsurati se apne kaagaz ka mahtva ki pradarshit kiya h..!! 👌👌👌
ReplyDeleteWonderful di
ReplyDeleteWow very very good writing shankhi di
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