AALAS AUR OVERTHINKING kA DARSHAN
क्या आलसी व्यक्ति भी कभी ब्लॉग लिख सकता है? असंभव ना? उतना ही असंभव और अविश्वसनीय जितना कि बीथोवेन(Beethoven) हारमोनियम पर सिम्फनी(symphony) बजाते हुए पाए गए और तानाशाह हिटलर टूथ्ब्रश मूँछों (toothbrush moustache) को छोड़कर गोटी(goatee- एक प्रकार की दाढ़ी का फैशन ) रखते हुए पाए गए| खैर आलसी आलसी में फर्क होता है| इन्हे मानकों के अनुरूप अलग- अलग नामों जैसे ढीठ, निठल्ला और कामचोर में बाँटा जाता है| किन्तु शोध से मुझे पता चला है कि मैं कुछ भिन्न किस्म की आलसी हूँ; मतलब आलस्य के साथ-साथ ओवरथिंकिंग का भी जुनून मेरे भीतर है| ओवरथिंकिंग को मौटे-मौटे अर्थों में समझा जाए तो, इंसानी दिमाग में हवाई किले बनाना, फिर उसे अच्छे से सजाना, और एक दिन अच्छा-सा मुहूरत देख के हवाई किलों को तोड़ देना और सलीके से मातम भी खुद ही मानना होता है| यह काम मैं घंटों बैठकर करती हूँ, और सच माने तो मैं इसे काम ही समझती हूँ| अगर घ...