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Showing posts from February, 2023

AALAS AUR OVERTHINKING kA DARSHAN

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   क्या आलसी व्यक्ति भी  कभी ब्लॉग लिख सकता है? असंभव ना?   उतना ही असंभव और अविश्वसनीय जितना कि बीथोवेन(Beethoven) हारमोनियम पर सिम्फनी(symphony) बजाते  हुए पाए गए और तानाशाह हिटलर टूथ्ब्रश मूँछों (toothbrush moustache) को छोड़कर गोटी(goatee- एक प्रकार की दाढ़ी का फैशन  ) रखते हुए पाए गए| खैर आलसी आलसी में फर्क होता है| इन्हे मानकों के अनुरूप अलग- अलग नामों जैसे ढीठ, निठल्ला और कामचोर में बाँटा जाता है|                                           किन्तु शोध से मुझे पता चला है कि मैं कुछ भिन्न किस्म की आलसी हूँ; मतलब आलस्य के साथ-साथ ओवरथिंकिंग का भी जुनून मेरे भीतर है| ओवरथिंकिंग को मौटे-मौटे अर्थों में  समझा जाए तो, इंसानी दिमाग में हवाई किले बनाना, फिर उसे अच्छे से सजाना, और एक दिन अच्छा-सा मुहूरत देख के हवाई किलों को तोड़ देना और सलीके से मातम भी खुद ही मानना होता है| यह काम मैं घंटों बैठकर करती हूँ, और सच माने तो मैं इसे काम ही समझती हूँ| अगर घ...

KAAGAZI

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  प्रिय पाठकों ,                                       (every blank diary filled with space)   T o be frank कहूँ तो, Anne frank की डायरी के पन्नों को पढ़ते हुए मैंने पाया है कि, सच में कागज़  इंसानों से अधिक सहनशील होते हैं| चाहे वह कागज़ का नक्शा हो या रद्दी का कागज या फिर दफ़्तर  में पड़ी कागज की फ़ाइलें| शायद सहनशील होने का गुण कागज़ के डीएनए (DNA) में होता है| जो उन्हें पेड़ों के सेलुलोस (cellulose) से मिलता है, और आप इसे पल्प फिक्शन(pulp fiction) कहें या कुछ और मुझे आज भी पेपर मनी(paper money)की पेड़ों पर लगने वाली बातें भी कहीं न कहीं सच  ही लगती है|                                                      कागज़ और इन्सानों के बीच तुलना सलीके से की जाती है, लेकिन समानता, महान दार्शनिक रूसो(Rousseau )  बता के गए हैं, वे कहते हैं की 'इन्सान ...